वाराणसी में विकास की कॉरिडोर रफ्तार तेज, परंपरा और आधुनिकता का अनोखा तमिल संगम”
वाराणसी में अनोखा तमिल संगम”
काशी तमिल संगम का आयोजन पिछले 4 वर्ष से उत्तर और दक्षिण भारत के संबंधों को मजबूत कर रही है केंद्र सरकार और राज्य सरकार भरपूर काम शुरू है और आयोजन भारत की दो प्राचीन संस्कृतियों विरासत परंपरा और भाषा को एक मंच प्रदान कर रहीं है इससे न सिर्फ ज्ञान और धर्म आध्यात्मिक खान-पान का प्रसार बढ़ा है बल्की बनारस की ब्रांड वैल्यू
इस भव्य कॉरिडोर ने शहर को एक नईं पहचान दी है और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है जिससे पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है काशी विश्वनाथ मंदिर प्राचीन भारतीय इतिहास से आ रहा है जो काशी विश्वनाथ मंदिर अत्यभूत हैं जो काशी विश्वनाथ मंदिर को हिन्दू धर्म सबसे महत्वपूर्ण पूजा स्थलों में से एक के रुप में व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त है क्योंकि इसमें शिव विश्वनाथ का ज्योतिलिंग स्थापित हैं जो कि वाराणसी कैट स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक कॉरिडोर निर्माण किया जा रहा है श्रद्धालुओं को दर्शन करने लिए निर्माण किया जा रहा है
आध्यात्मिक धरोहर अब भी उज्ज्वल
प्राचीन अस्सी घाट पर गंगा आरती जो शाम को नजारा देखने में अच्छा लगता हैं रोजाना श्रद्धालु हजारों यहां पर पहुंचते हैं वहां पर गंगा आरती देखते हैं यह स्थान सुबह ए बनारस जैसे कार्यक्रम के साथ सुबह योग और ध्यान और शाम को संस्कृति कार्यक्रम ऑन के लिए प्रसिद्ध है वाराणसी का एक प्रसिद्ध प्राचीन घाट है
नहाने के लिए सबसे प्रसिद्ध घाट
वाराणसी में स्नान के लिए मणिकर्णिका घाट और दशाश्वमेध घाट सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माने जाते हैं जहां स्नान से पापो मुक्त और मोक्ष प्राप्त होती है खासकर मणिकर्णिका घाट को मोक्षदयानी घाट भी कहते हैं दशाश्वमेध घाट अपनी भव्य गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध हैं इसके अलावा अस्सी घाट पंचगंगा घाट और ललित घाट भी स्नान और दर्शन के लिए विशेष महत्व रहता है
नमो घाट
सूर्य को प्रणाम करते हाथों को जोड़कर बनाई गई मूर्तियां घाट की नई पहचान बन गई है यहां तीन मर्तियां 75 फीट और 25 फीट 15 फीट ऊंची है जो गंगा को नमन करते हुए प्रतीक है यह राजघाट के बगल स्थित है जो रोज हजारों लोग यहां पर घूमने आते हैं
बनारसी संस्कृति और हस्तशिल्प की पहचान
बनारसी साड़ी, लकड़ी के खिलौने, पीतल के बर्तन और हैंडलूम उद्योग वाराणसी की सांस्कृतिक पहचान हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा इन पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है


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